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RBI का बड़ा फैसला: इंटरऑपरेबल टोकनाइजेशन से खत्म होगा Apple और Google का दबदबा

RBI का बड़ा फैसला: इंटरऑपरेबल टोकनाइजेशन से खत्म होगा Apple और Google का दबदबा

26 September 2025 

इंडिया में Digitalization बहुत ही तेज़ी से फ़ैल रहा है और इसमें जो सबसे पहले शुरू हुई थी वो है ऑनलाइन पेमेंट करना l अब इसकी डिमांड बहुत ज्यादा है मार्केट में अब हर कोई ऑनलाइन या कार्ड का इस्तेमाल करता है पेमेंट करने के लिए l लेकिन इससे बहुत सारे फ्रॉड या कभी -कभी हमारा डाटा लीक होने की भी खबर आती है l

 इसी खतरे को कम करने के लिए भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने टोकनाइजेशन की सुविधा शुरू की थी। अब RBI ने इसमें बड़ा बदलाव करते हुए इसे इंटरऑपरेबल (सभी के लिए समान) बना दिया है। इस फैसले से अब सिर्फ बड़ी टेक कंपनियों जैसे Apple और Google को ही फायदा नहीं मिलेगा, बल्कि सभी बैंक और पेमेंट कंपनियां इस सिस्टम का इस्तेमाल कर पाएंगी।
टोकनाइजेशन क्या होता है?

टोकनाइजेशन एक सुरक्षा तकनीक है जिसमें आपके डेबिट या क्रेडिट कार्ड का असली नंबर किसी ऑनलाइन पेमेंट में इस्तेमाल नहीं होता।
उसकी जगह एक यूनिक टोकन नंबर इस्तेमाल किया जाता है।

यह टोकन असली कार्ड नंबर से जुड़ा तो होता है, लेकिन इसे कोई हैक कर भी ले तो उसका गलत इस्तेमाल नहीं कर सकता।
इससे आपकी निजी बैंकिंग जानकारी सुरक्षित रहती है।

उदाहरण के लिए, मान लीजिए आपने किसी शॉपिंग वेबसाइट पर पेमेंट किया। अब वेबसाइट को आपका असली कार्ड नंबर नहीं मिलेगा, बल्कि एक टोकन नंबर मिलेगा। इससे डेटा चोरी होने का रिस्क बहुत कम हो जाता है।

पहले की स्थिति

पहले टोकनाईज़ेशन का लाभ ज्यादातर या यूं कहा जाए की इसका ज्यादा कन्ट्रोल एप्पल पे या गूगल पे जैसे बड़े इंटरनेशनल पेमेंट प्लेटफॉर्म तक सीमित था l इसका मतलब ये है कि हमारे देश के जो पेमेंट apps हैं जैसे - Phone Pay , Bharat Pay paytm बैंक इस सुविधा में उतने सक्षम नहीं थे। इससे इन बड़ी कंपनियों का दबदबा और मजबूत हो
 रहा था।


RBI का नया फैसला

RBI ने अब यह नियम बदल दिया है और टोकनाइजेशन को इंटरऑपरेबल बना दिया है।
इसका मतलब है कि अब हर बैंक, पेमेंट गेटवे और मोबाइल ऐप इस सुविधा का इस्तेमाल कर सकता है।
अब किसी एक कंपनी के पास ज्यादा कंट्रोल नहीं रहेगा।
इससे डिजिटल पेमेंट इंडस्ट्री में बराबरी का माहौल बनेगा।

ग्राहकों को क्या फायदा होगा? 

अब आपको पहले से ज्यादा सुरक्षा मिलेगी आपका असली कार्ड नंबर शेयर नहीं होगा l ये सुविधा अब केवल बड़ी कंपनियों के पास नहीं रहेगा बल्कि भारत के और भी जो apps हैं और छोटे starups हैं उन्हें भी मौका मिलेगा l 

सुरक्षा में सुधार – ज्यादा ऐप्स और बैंक टोकनाइजेशन का इस्तेमाल करेंगे, तो धोखाधड़ी (fraud) का खतरा कम होगा।


4. प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी – बड़ी कंपनियों का दबदबा घटेगा और छोटे स्टार्टअप्स को भी मौका मिलेगा। 
निष्कर्ष

अब डिजिटल पेमेंट का खेल बराबरी का होगा और इसका सबसे बड़ा फायदा आम यूज़र्स और भारतीय फिनटेक कंपनियों को मिलेगा। अब पेमेंट सिर्फ Apple और Google जैसी कंपनियों तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि हर ऐप और बैंक इस सुविधा का फायदा ले सकेगा।

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